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#Climate2026

जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण पूर्ण ज्ञान एवं संदर्भ पुस्तिका – 2026

CLIMATE CHANGE • IPCC • COP • INDIA • RAJASTHAN 2026
2026
📘 विज्ञान · अंतर्राष्ट्रीय · भारत · राजस्थान · नीतियाँ · कानून

1. जलवायु परिवर्तन क्या है? – मूल अवधारणा

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पृथ्वी के तापमान और मौसम पैटर्न में दीर्घकालिक परिवर्तन है। यह मुख्यतः मानवीय गतिविधियों – जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल, गैस) का दहन, वनों की कटाई, उद्योग, कृषि – के कारण ग्रीनहाउस गैसों (GHGs) के उत्सर्जन से होता है।

जलवायु परिवर्तन बनाम मौसम परिवर्तन:

  • मौसम (Weather): किसी स्थान की अल्पकालिक वायुमंडलीय स्थिति (तापमान, वर्षा, आर्द्रता)।
  • जलवायु (Climate): किसी स्थान के दीर्घकालिक (30+ वर्ष) मौसम पैटर्न का औसत।
📌 महत्व: जलवायु परिवर्तन मानव सभ्यता की सबसे बड़ी चुनौती है – इसका प्रभाव सभी क्षेत्रों (कृषि, स्वास्थ्य, जल, ऊर्जा, अर्थव्यवस्था) पर पड़ता है।

2. जलवायु परिवर्तन का विज्ञान – IPCC AR6 रिपोर्ट (2023)

IPCC (Intergovernmental Panel on Climate Change) संयुक्त राष्ट्र की वैज्ञानिक संस्था है जो जलवायु परिवर्तन पर नवीनतम वैज्ञानिक अनुसंधान का मूल्यांकन करती है। छठी आकलन रिपोर्ट (AR6 – 2023) जलवायु विज्ञान पर सबसे व्यापक रिपोर्ट है।

📋 मुख्य निष्कर्ष:

संकेतकनिष्कर्ष
तापमान वृद्धि2011-2020 में वैश्विक सतह तापमान 1850-1900 की तुलना में 1.1°C अधिक
मानवीय प्रभावमानवीय गतिविधियों ने निर्विवाद रूप से (unequivocally) ग्लोबल वार्मिंग उत्पन्न की है
परिवर्तन की गतिवायुमंडल, महासागर, क्रायोस्फीयर (हिमनद) एवं जीवमंडल में व्यापक एवं तीव्र परिवर्तन
अनुभाग Aजलवायु परिवर्तन की वर्तमान स्थिति एवं रुझान
अनुभाग B2100 तक एवं उससे परे दीर्घकालिक आकलन
अनुभाग Cनिकट-अवधि (2040 तक) में प्रभावी कार्रवाई के अवसर
📌 महत्वपूर्ण: IPCC AR6 चेतावनी देता है कि 1.5°C से अधिक तापमान वृद्धि के गंभीर परिणाम होंगे – समुद्र स्तर वृद्धि, अत्यधिक मौसमी घटनाएँ, जैव विविधता हानि, एवं खाद्य सुरक्षा पर संकट।

3. ग्रीनहाउस गैसें (GHGs) एवं उनके स्रोत

गैसरासायनिक सूत्रमुख्य स्रोतग्लोबल वार्मिंग क्षमता (100 वर्ष)
कार्बन डाइऑक्साइडCO₂जीवाश्म ईंधन दहन, वनों की कटाई, उद्योग1 (संदर्भ)
मीथेनCH₄कृषि, पशुपालन, लैंडफिल, कोयला खनन~28 गुना CO₂
नाइट्रस ऑक्साइडN₂Oउर्वरक, औद्योगिक प्रक्रियाएँ~265 गुना CO₂
F-गैसेंHFCs, PFCs, SF₆रेफ्रिजरेशन, AC, इलेक्ट्रॉनिक्सहजारों गुना CO₂

4. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

🔴 वैश्विक प्रभाव

  • तापमान वृद्धि: 2100 तक 1.5°C से 4.5°C तक वृद्धि का अनुमान
  • समुद्र स्तर वृद्धि: 2100 तक 0.3-1.1 मीटर वृद्धि
  • अत्यधिक मौसमी घटनाएँ: चक्रवात, बाढ़, सूखा, ताप लहरें
  • जैव विविधता हानि: 1 मिलियन से अधिक प्रजातियाँ विलुप्त होने के खतरे में
  • खाद्य सुरक्षा: फसल उत्पादन में कमी, मछली पालन प्रभावित

🟡 भारत पर प्रभाव

  • हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना: जल संकट गहराना
  • मानसून की अनिश्चितता: कृषि उत्पादन प्रभावित
  • तटीय क्षेत्र: समुद्र स्तर वृद्धि से मुंबई, चेन्नई, कोलकाता खतरे में
  • स्वास्थ्य: गर्मी से मौतें, वेक्टर-जनित रोगों में वृद्धि
  • जल संकट: देश के 40% क्षेत्र में जल की कमी

🟢 राजस्थान पर प्रभाव

  • राजस्थान को भारत के सबसे संवेदनशील राज्यों में से एक माना जाता है
  • मरुस्थलीकरण: थार रेगिस्तान का विस्तार
  • जल संकट: गिरते भू-जल स्तर, सूखे की बढ़ती आवृत्ति
  • कृषि: फसल उत्पादन में कमी, पशुपालन प्रभावित
  • गर्मी: तापमान में वृद्धि, हीट वेव की घटनाएँ

5. अंतर्राष्ट्रीय जलवायु ढाँचा

5.1. UNFCCC (1992)

United Nations Framework Convention on Climate Change – जलवायु परिवर्तन पर पहली अंतर्राष्ट्रीय संधि। 195 देशों (Parties) ने अनुसमर्थन किया। अंतिम उद्देश्य: "वायुमंडल में GHG सांद्रता को खतरनाक स्तर पर स्थिर करना।"

प्रमुख सिद्धांत:

  • सामान्य लेकिन विभेदित उत्तरदायित्व (CBDR): विकसित देशों का अधिक उत्तरदायित्व
  • पूर्व-सावधानी (Precautionary Principle)
  • भागीदारी (Participation)

5.2. पेरिस समझौता (2015)

पेरिस समझौता UNFCCC के तहत एक ऐतिहासिक समझौता है, जिसे 196 देशों ने अपनाया।

प्रमुख लक्ष्य:

  • वैश्विक तापमान वृद्धि को 2°C से कम, एवं 1.5°C तक सीमित करने का प्रयास
  • हर 5 वर्ष में राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDCs) प्रस्तुत करना
  • विकसित देशों को जलवायु वित्त प्रदान करना (2020 से $100 बिलियन/वर्ष)
  • अनुच्छेद 6: कार्बन बाजारों के लिए ढाँचा

5.3. ग्लासगो जलवायु समझौता (COP26 – 2021)

  • कोयला: "कोयले का चरणबद्ध अंत" – पहली बार किसी COP समझौते में कोयले का उल्लेख
  • Net-Zero 2050 लक्ष्य को मजबूत किया
  • 2030 तक 45% उत्सर्जन कटौती का आह्वान

5.4. पेरिस समझौता कार्यान्वयन युग (2026)

  • जून 2026 के बॉन वार्ता ने पेरिस समझौते के "कार्यान्वयन युग" की शुरुआत की
  • 2028 में दूसरे ग्लोबल स्टॉकटेक से पहले प्रगति हेतु वार्ता
  • 136 पार्टियों ने नए NDCs प्रस्तुत किए
  • 45 देशों ने NDCs प्रस्तुत नहीं किए (जुलाई 2026 तक)

5.5. अमेरिका की वापसी (2025)

  • जनवरी 2025 में अमेरिका ने पेरिस समझौते से वापसी की प्रक्रिया शुरू की

6. COP सम्मेलन – COP28, COP29, COP30

6.1. COP28 (दुबई, UAE – 2023)

प्रमुख परिणाम:

  • "फॉसिल फ्यूल से संक्रमण" – पहली बार किसी COP में जीवाश्म ईंधन से "दूर जाने" (transitioning away) का आह्वान
  • 2050 तक Net-Zero लक्ष्य
  • नुकसान एवं क्षति कोष (Loss & Damage Fund) का संचालन
  • वैश्विक स्टॉकटेक (Global Stocktake) का समापन

6.2. COP29 (बाकू, अज़रबैजान – 2024)

प्रमुख परिणाम:

  • जलवायु वित्त पर प्रतिबद्धताओं की पुष्टि
  • न्यायसंगत संक्रमण (Just Transition) पर सहमति

6.3. COP30 (बेलेम, ब्राज़ील – 10-22 नवंबर 2025)

COP30 सबसे हालिया प्रमुख COP सम्मेलन था। 56 निर्णय सर्वसम्मति से अपनाए गए।

📋 COP30 के 56 निर्णय – प्रमुख विषय:

विषयनिर्णय
शमन (Mitigation)उत्सर्जन कटौती की दिशा में नए लक्ष्य
अनुकूलन (Adaptation)अनुकूलन वित्त को 3 गुना करने पर सहमति
वित्त (Finance)2035 तक $1.3 ट्रिलियन जुटाने का लक्ष्य (जिसमें $300 बिलियन सार्वजनिक संसाधन)
प्रौद्योगिकीप्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा
नुकसान एवं क्षति (Loss & Damage)कोष का संचालन एवं पुनःपूर्ति
न्यायसंगत संक्रमण (Just Transition)नया न्यायसंगत संक्रमण तंत्र (Just Transition Mechanism)

🚫 फॉसिल फ्यूल पर विवाद:

  • यूरोपीय संघ ने फॉसिल फ्यूल के चरणबद्ध अंत (phase-out) की माँग की
  • COP30 के अंतिम समझौते में फॉसिल फ्यूल का कोई उल्लेख नहीं किया गया
  • केवल "स्वैच्छिक" त्वरित कार्रवाई का आह्वान
  • COP28 (दुबई) के "संक्रमण" समझौते को दोहराया गया

🌍 बेलेम घोषणा (Belém Declaration):

  • पर्यावरणीय नस्लवाद (Environmental Racism) के विरुद्ध बेलेम घोषणा
  • लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, एशिया, ओशिनिया के देशों द्वारा समर्थित

7. जलवायु वित्त एवं कार्बन बाजार (पेरिस समझौता अनुच्छेद 6)

7.1. जलवायु वित्त (Climate Finance)

  • COP29/COP30 लक्ष्य: 2035 तक $1.3 ट्रिलियन प्रतिवर्ष
  • अनुकूलन वित्त: 2035 तक 3 गुना करने की प्रतिबद्धता
  • नुकसान एवं क्षति कोष: संचालन एवं पुनःपूर्ति

7.2. अनुच्छेद 6 – कार्बन बाजार

अनुच्छेद 6 पेरिस समझौते का वह प्रावधान है जो कार्बन क्रेडिट एवं उत्सर्जन कटौती के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करता है।

अनुच्छेदविवरण
अनुच्छेद 6.2द्विपक्षीय (बिलेटरल) उत्सर्जन कटौती हस्तांतरण
अनुच्छेद 6.4UN-संचालित केंद्रीय कार्बन बाजार

वर्तमान स्थिति (2026):

  • 106 देशों ने अनुच्छेद 6.2 के तहत रिपोर्टिंग प्रारंभ की
  • पहला UN कार्बन क्रेडिट 2026 में म्यांमार के कुकस्टोव (cookstove) परियोजना से जारी
  • 9 देशों (स्विट्जरलैंड, घाना आदि) ने अनुच्छेद 6.2 के तहत प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की
  • UNIDO एवं A6IP ने उच्च-अखंडता कार्बन बाजारों को आगे बढ़ाने हेतु संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए (10 अप्रैल 2026)

8. भारत की जलवायु नीतियाँ एवं योजनाएँ

8.1. राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC – 2008)

NAPCC भारत की जलवायु रणनीति की आधारशिला है। इसमें 8 राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं:

क्र.सं.मिशनउद्देश्य
1राष्ट्रीय सौर मिशन (National Solar Mission)सौर ऊर्जा को बढ़ावा
2राष्ट्रीय उन्नत ऊर्जा दक्षता मिशनऊर्जा दक्षता में सुधार
3राष्ट्रीय सतत आवास मिशनजलवायु-अनुकूल आवास
4राष्ट्रीय जल मिशनएकीकृत जल संसाधन प्रबंधन
5हिमालयी पारिस्थितिकी सततता मिशनहिमालयी पारिस्थितिकी संरक्षण
6हरित भारत मिशनवन आवरण एवं पारिस्थितिकी सेवाएँ बढ़ाना
7राष्ट्रीय सतत कृषि मिशनजलवायु-लचीली कृषि
8जलवायु परिवर्तन पर रणनीतिक ज्ञान मिशनअनुसंधान, प्रशिक्षण, जागरूकता

8.2. राष्ट्रीय अनुकूलन कोष (NAFCC)

उद्देश्य: NAPCC के मिशनों के अनुरूप अनुकूलन परियोजनाओं को वित्तपोषित करना।

8.3. ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (2023)

  • 2030 तक 5 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन
  • 125 GW अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता
  • ₹8 लाख करोड़ (~$100 बिलियन) का निवेश
  • 50 MTPA CO₂ उत्सर्जन में कमी

8.4. LiFE मूवमेंट (2022)

Lifestyle for Environment – प्रधानमंत्री मोदी द्वारा COP26 में प्रस्तावित, सतत उपभोग के लिए नागरिक अभियान।

9. भारत की राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) 2026

मार्च 2026 में भारत के मंत्रिमंडल ने 2031-2035 के लिए अद्यतन NDCs को मंजूरी दी।

📋 भारत के NDC लक्ष्य (2026)

लक्ष्यविवरण
उत्सर्जन तीव्रता में कमी2035 तक 2005 के स्तर से 47% कम
गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता2035 तक कुल स्थापित क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म
Net-Zero2070 तक

📊 प्रगति (2026 तक):

  • उत्सर्जन तीव्रता में कमी: 2005-2020 के बीच 36% कम
  • गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता: 52.57% (फरवरी 2026)
  • 50% गैर-जीवाश्म लक्ष्य: अक्टूबर 2025 में प्राप्त – 5 वर्ष पूर्व

10. भारत की Net-Zero 2070 प्रतिबद्धता

भारत ने COP26 (ग्लासगो, 2021) में 2070 तक Net-Zero (शून्य कार्बन उत्सर्जन) का लक्ष्य घोषित किया।

🛤️ Net-Zero 2070 की राह:

  • वन एवं वृक्ष आवरण में वृद्धि – CO₂ अवशोषण
  • कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण (CCUS)
  • नवीकरणीय ऊर्जा में विस्तार – 2030 तक 500 GW
  • ग्रीन हाइड्रोजन – 2030 तक 5 MTPA
  • परमाणु ऊर्जा – निजी क्षेत्र की भागीदारी हेतु SHANTI अधिनियम (2025)
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) को बढ़ावा

11. भारत की प्रमुख पर्यावरणीय कानून

11.1. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (EPA)

बोपाल गैस त्रासदी (1984) के बाद अधिनियमित। यह छत्र कानून (umbrella legislation) है।

प्रमुख प्रावधान:

  • केंद्र सरकार को पर्यावरण संरक्षण हेतु व्यापक शक्तियाँ
  • अधिसूचनाएँ जारी करने का अधिकार
  • प्रदूषण मानक निर्धारित करना
  • उल्लंघन पर दंड (धारा 15)

हालिया संशोधन (2023-2025):

संशोधनविवरण
जन विश्वास अधिनियम 2023EPA, वायु अधिनियम, जल अधिनियम के प्रावधानों को अपराध-मुक्त (decriminalized) किया
पर्यावरण संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2025लोकसभा में 5 दिसंबर 2025 को पेश
पर्यावरण संरक्षण निधि नियम, 202615 जनवरी 2026 को MoEFCC द्वारा अधिसूचित – प्रदूषण दंड से एकत्रित धन का उपयोग
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमजिला कलेक्टरों को प्रवर्तन शक्तियाँ

11.2. वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981

  • वायु गुणवत्ता मानक
  • प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
  • जन विश्वास अधिनियम 2023 के तहत अपराध-मुक्त

11.3. जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974

  • जल गुणवत्ता मानक
  • जन विश्वास अधिनियम 2023 के तहत अपराध-मुक्त

11.4. वन संरक्षण अधिनियम, 1980

  • गैर-वन उपयोगों के लिए वन भूमि के रूपांतरण पर रोक
  • केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक

11.5. जैव विविधता अधिनियम, 2002

  • जैविक संसाधनों का संरक्षण
  • राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA)
  • पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण

11.6. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010

  • पर्यावरणीय विवादों के त्वरित निपटान हेतु विशेष न्यायाधिकरण
  • 5 वर्षों के भीतर मामलों का निपटान

12. CCPI 2026 में भारत की रैंकिंग

Climate Change Performance Index (CCPI) जर्मनवॉच (Germanwatch) द्वारा जारी किया जाता है।

वर्षरैंकस्कोरश्रेणी
20247वींउच्च प्रदर्शनकर्ता
202510वींउच्च प्रदर्शनकर्ता
202623वीं61.31मध्यम प्रदर्शनकर्ता

📉 गिरावट के कारण:

  • नवीकरणीय ऊर्जा प्रदर्शन में सबसे बड़ी गिरावट
  • कोयला पर निर्भरता एवं कोयला निकासी (coal exit) योजना का अभाव
  • भारत को तेल, गैस एवं कोयला के सबसे बड़े उत्पादकों में स्थान

13. राजस्थान की जलवायु नीतियाँ एवं योजनाएँ

13.1. राजस्थान राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (SAPCC)

राजस्थान SAPCC राज्य की जलवायु रणनीति का मार्गदर्शन करती है:

  • मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए विशिष्ट रणनीतियाँ
  • जल संसाधन प्रबंधन पर ध्यान
  • कृषि एवं पशुपालन के लिए जलवायु-लचीली रणनीतियाँ
  • वनीकरण एवं सामाजिक वानिकी

13.2. जलवायु परिवर्तन अनुकूलन योजना (2025-2030)

  • 5-वर्षीय अनुकूलन योजना
  • Mission LiFE (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) के साथ संरेखित
  • जलवायु परिवर्तन उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) – ₹150 करोड़
  • 10 करोड़ पेड़ लगाने की योजना

13.3. IIT जोधपुर – RSPCB समझौता

  • IIT जोधपुर एवं राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) के बीच MoU
  • उद्देश्य: जलवायु लचीलापन एवं पर्यावरणीय शासन को मजबूत करना
  • गतिविधियाँ: उन्नत जलवायु एवं प्रदूषण मॉडलिंग, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, जल संसाधन, कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य, शहरी शासन के लिए अनुकूलन रणनीतियाँ

13.4. अन्य राज्य पहल

  • मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान – जल संचयन, सामुदायिक भागीदारी
  • राजस्थान सर्कुलर इकोनॉमी इंसेंटिव स्कीम-2025 – रिड्यूस, रियूज, रीसाइकिल को बढ़ावा
  • ग्रीन क्रेडिट योजना – उद्यमों एवं शहरी निकायों के लिए – नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण
  • 15-वर्षीय वाहन स्क्रैप नीति – पुराने वाहनों को स्क्रैप करना

14. राजस्थान का हरित बजट 2025-26

राजस्थान का पहला हरित बजट (Green Budget):

पैरामीटरविवरण
कुल हरित व्यय₹27,854 करोड़
GDP का प्रतिशत11.34%
प्रमुख क्षेत्रनवीकरणीय ऊर्जा, वृत्ताकार अर्थव्यवस्था, जलवायु लचीलापन, हरित विकास

15. चुनौतियाँ एवं भविष्य की दिशा

⚠️ चुनौतियाँ

वैश्विक:

  • उत्सर्जन में कमी की अपर्याप्त गति
  • जलवायु वित्त का अभाव (विकसित देशों की प्रतिबद्धताएँ अधूरी)
  • फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता
  • भू-राजनीतिक तनाव

भारत:

  • कोयला पर निर्भरता (उत्पादन एवं खपत)
  • CCPI रैंकिंग में गिरावट
  • जलवायु परिवर्तन के प्रति उच्च संवेदनशीलता
  • शहरी प्रदूषण (वायु गुणवत्ता)
  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा की पहुँच

राजस्थान:

  • जल संकट – सबसे शुष्क राज्यों में से एक
  • मरुस्थलीकरण का खतरा
  • कृषि पर निर्भरता – जलवायु परिवर्तन से अत्यधिक प्रभावित
  • वन आवरण में कमी

✅ भविष्य की दिशा

वैश्विक:

  • COP30 (2025) के 56 निर्णयों का कार्यान्वयन
  • $1.3 ट्रिलियन जलवायु वित्त जुटाना
  • पेरिस समझौते का कार्यान्वयन युग (2026 से)
  • अनुच्छेद 6 कार्बन बाजार का संचालन

भारत:

  • 2035 NDC लक्ष्य: 47% उत्सर्जन तीव्रता कमी, 60% गैर-जीवाश्म क्षमता
  • Net-Zero 2070: CCUS, वनीकरण, ग्रीन हाइड्रोजन
  • SHANTI अधिनियम – परमाणु ऊर्जा में निजी निवेश
  • 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा
  • 2030 तक 5 MTPA ग्रीन हाइड्रोजन

राजस्थान:

  • हरित बजट – ₹27,854 करोड़
  • 40,000 MW सौर ऊर्जा (2030 तक)
  • जलवायु परिवर्तन उत्कृष्टता केंद्र – ₹150 करोड़
  • 10 करोड़ पेड़ लगाना
  • ग्रीन हाइड्रोजन वैली (बाड़मेर/जैसलमेर)
🔑 मुख्य निष्कर्ष: जलवायु परिवर्तन मानवता की सबसे बड़ी चुनौती है। भारत NDC 2026, Net-Zero 2070, ग्रीन हाइड्रोजन, 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से इस चुनौती से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है। राजस्थान हरित बजट, 40,000 MW सौर, ग्रीन हाइड्रोजन वैली के साथ अग्रणी राज्यों में है।

16. शब्दावली (ग्लोसरी)

IPCC – Intergovernmental Panel on Climate Change – जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की वैज्ञानिक संस्था
AR6 – IPCC की छठी आकलन रिपोर्ट (2023)
UNFCCC – United Nations Framework Convention on Climate Change – जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र संधि (1992)
NDC – Nationally Determined Contribution – राष्ट्रीय निर्धारित योगदान
Net-Zero – शून्य कार्बन उत्सर्जन (उत्सर्जन एवं अवशोषण का संतुलन)
CCPI – Climate Change Performance Index – जलवायु प्रदर्शन सूचकांक
GHG – Greenhouse Gases – ग्रीनहाउस गैसें (CO₂, CH₄, N₂O, F-gases)
COP – Conference of Parties – UNFCCC के सदस्य देशों का वार्षिक सम्मेलन
CBDR – Common But Differentiated Responsibilities – सामान्य लेकिन विभेदित उत्तरदायित्व
Loss & Damage – जलवायु परिवर्तन से होने वाली क्षति एवं हानि
Just Transition – न्यायसंगत संक्रमण – जलवायु कार्रवाई में श्रमिकों एवं समुदायों का समर्थन
CCUS – Carbon Capture, Utilization & Storage – कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण
NAPCC – National Action Plan on Climate Change – राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना
SAPCC – State Action Plan on Climate Change – राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना
MoEFCC – Ministry of Environment, Forest and Climate Change – पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
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